Tuesday, June 15, 2010

तुम्ही से मुहब्बत और तुम्ही से लड़ाई

जनाब तुम्ही से मुहब्बत और तुम्ही से लड़ाई मुहावरे को अगर दृश्य रूप में समझना हो तो एक बार आप नेता सुकंठी से मिल लें। उनके पास प्रेम के से लोगों को प्रेम पाश में बांधने का ऐसा फामूर्ला है कि सबका फार्मूला फेल हो जाता है। सिने सितारों और चांदनियों पर उनका ऐसा जादू चलता है कि बस उनके एक अलाप पर सब सुर में सुर मिला लेते हैं। मंच हो या लंच यह अक्सर उन स्थलों पर अपनी बयानबाजी से मीडिया में छाए रहते हैं। मेरे एक मित्र थोड़े पत्रकार टाइप हैं। कभी कभी उनकी खबरें बस फुसफुसा कर रह जाती हैं। कभी कभी विस्फोट करने के लिए लिखते हैं कि लेकिन एक दम से शांति से छा जाती है। एक दिन उनकी नौकरी पर बन आई। बस किसी ने राय दी और वह झट से नेता सुकंठी से मिले। बोले नेता जी आप कुछ भी बोल दीजिए जो खबर बन जाए, मेरी नौकरी का मामला है। मामला जनता के भला का था उस पत्रकार के परिवार का वोट तो उन्हे मिल ही जाता। उन्होने झट से कहा जल्द ही इस मेरे लोक सभा क्षेत्र में लोगों को मिठाइयां बंटेगी इसके साथ ही जो लोग टीवी में नाचते थे वह खेतों में नाचेंगे। खबर छपी, खबर का असर भी हुआ। सिने तारिकोओं को देखने के लोग पहले नए कपड़े बनवाए, साबुन से नहाया, गेंहूं-चावल बेंच कर झंडा खरीदा। प्रशासन भी जिंस की तरह चुस्त हो गया। पत्रकार की भी बल्ले-बल्ले हो गई। नेता जी की पार्टी से विज्ञापन भी आने लगे। नेता जी ने स्वयं कार्यक्रम में तारिकायों के संग रसभरी नृत्य प्रस्तुति दी। उनकी पार्टी के लगभग उदित और नवोदित दोनों तरह के कार्यकर्ता आए थे। लोगों ने उनसे आशीष लिए। नेता जी को जब लगा कि उनसे अधिक लोकप्रियता उनके कार्यक्रम में आये सुपर स्टार को मिल रही है तो उन्होने तुरंत सुपर स्टार के दुर्दिन के दिन मीडिया के सामने गाने लगे। कुछ दिन बाद सुपर स्टार ने इनकी पार्टी को राम राम कर दिया। नेता जी की महिमा में कोई कमी नहीं आई वह अपनी बोली की गोली चलाते रहे विपक्षी मुस्कुराते रहे। एक दिन किसी मंच पर फिर स्टार से टकरा गए और उन्हे अपना शुभ चिंतक तथा घनिष्ठ मित्र बताया। लंच पर उनसे कहा कि अब स्टार वार खत्म हो गया है। आपकी फिल्में भी ठीक-ठाक चल रहीं हैं। मेरी पार्टी में कार्यकर्ता भी जुड़ रहे हैं। मिल के पार्टी को गति दें तो दोनों की मौजा ही मौजा होगी। भाई स्टार आप मंच पर भाभी जी के साथ आएं तो महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा। अब गुस्सा को थू करो जी, अरे मुहब्बत तुमसे है तो लड़ाई क्या पड़ोसी से करेंगे?

1 comments:

indli said...

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

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