Friday, December 18, 2009

पुनर्जन्म की लीला

जब आप मुस्कुराते हैं तो खुल कर नहीं मुस्कुराते, इसका भी पैसा लगता है। क्या बात है कोई संकोच है ? ये बात मियां लल्लन ने पड़ोसी फुन्नन से पूछा। इस पर फुन्नन थोड़ा और गंभीर हो गये और कहा हम सिने तारिका नहीं है जो पैसा लेकर मुस्क राएं। अगर मुस्कुराने के पैसे मिलने लगे तो मैं परिवार समेत मुस्क राऊं। लेकिन भाई मंहगाई बौराये गधे जसे दुलत्ती झाड़ रही है, दाल चावल को बिना चूल्हे पर चढ़ाए आग लगी है, हरी सब्जी के बिना बच्चों के चेहरे पीले पड़ रहे हैं और लाल टमाटर अच्छे नहीं लगते। कुछ जुगाड़ बता दो कि हमारे घर भी गीला आटा तबे पर चढ़ जाए?
लल्लन जो खुद कई दिनों से नौकरी की तलाश में घूम रहे थे बोल पड़े आजकल टीवी पर पुनर्जन्म वाला कार्यक्रम आ रहा है सुना है सब कुछ सच सच बता दे रहे हैं। मैंने 111 रुपए देकर एक बार पंडित जी से पूछा था कि पिछले जन्म में मैं क्या था वह बोले गधा था मुङो यकीन नहीं हो रहा है इसलिए सोच रहा हूं अब उस टीवी वाले से पूछ लूं क्या पता किसी रईस या नेता का बेटा निकल जाऊं तो जनता कुछ तो तरस खाएगी। क्या पता सत्ताधारी पार्टी में किसी का रिश्तेदार ही निकल जाऊं तो कोई तो रिश्तेदारी निभाएगा.. फु न्नन तुम भी चलो क्या पता किसी एक का मामला बैठ गया तो दोनों की चांदी हो जाएगी। यह बात लल्लन का बेटा सुन रहा था बोला पिता जी जब लौट कर आना तो जुगाड़ सीख कर आना, यहां पर हम लोग दूसरों के पुनर्जन्म की बात बताएंगे। मंगरू प्रधान पक्का उस जन्म में चार सौ बीस या ठग रहा होगा सब नरेगा का पैसा भकोस जाता है। इस पर लल्लन ने उसे डांट दिया। मामला फिट कर लोग मुम्बई जा पहुंचे। जितने लोगों का पुनर्जन्म के बारे में देखा गया सब ऊंचे आदमी थे या नीचे भी थे तो पक्के इमानदार। लल्लन ने सबके बारे में अटकलें लगाई कि कौन पिछले जन्म में क्या हो सकता है, फुन्नन से बोला मल्लिका जरूर उर्वशी या मेनका रही होगी, अमिताभ तो जरुर पा पा के पापा रहे होगें। फुन्नन ने सकु चाते हुए पूछा कि राखी सावंत क्या थी..इस पर लल्लन ने कहा एकदम से बकलोल ही हो, अपने बारे में नहीं सोच रहे। किसी तरह मामला फिट बैठा लेकिन पता चला कि लल्लन हलवाहा और फुन्नन जमादार थे। मुंह लटकाए लल्लन लौट आए उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि अब तक किसी आत्महत्या करने वाला किसान, दहेज के लिए जली बहू और भूख से मरा गरीब इस जन्म में कोई बड़ा आदमी क्यों नहीं बनता। फुन्नन बोला अब समझ में आया कि हम गरीब क्यों हैं ये ससुरी पिछले जनम से ही पीछे पड़ी है......

अभिनव उपाध्याय

1 comments:

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

बेहतरीन भाई....!

Post a Comment

एक ही थैले के...

गहमा-गहमी...